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लखुउड़्यार शैलाश्रय अल्मोड़ा
aolaol · 2020-04-17
हजारों वर्ष पूर्व, प्रागेतिहासिक युग के लोग कैसे रहते होंगे, तब - जब आदमी पेड़ो और गुफाओं मे रहता था, उसने पत्थरों से आग जलाना सीखा, और फिर पत्थरो के हथियार बना शिकार करना सीखा। और उसने सीखा - अपने शिकार को आग में आग मे भून कर खाना।
इसके साथ उसने चित्र बनाने भी सीखे और calligraphy की शुरुआत की शुरुआत की, और उस युग के बने कुछ चित्रों को देखने के लिए उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में 'लखुउड्यार' नाम की जगह मे आया जा सकता है।
लखुउड्यार बहुत ज्यादा नहीं बदला, प्रगतिहासिक युग मे यह जगह जैसी रही होगी, आज भी उतनी ही शांत हैं, सिवाय इसके कि अब ये मोटोरेबल रोड के किनारे हैं, और यहाँ तक रोड से पहुचने के लिए सीमेंटेड रास्ता।
लखुड़ियार शैलाश्रय - अल्मोड़ा से 15 किलोमीटर और चितई से से 7 किमी की दूरी पर बाड़ेछीना के निकट चीड़ के पेड़ो से घिरे एक शांत और सुरम्य स्थल पर है।
यो तो शैलाश्रय देश के विभिन्न हिस्सों सहित दुनिया भर मे कई जगहों पर हैं। लखुड़ियार less explored खूबसूरत स्थल है।
लखु जिसका अर्थ है - 'लाख' यानि 100 thousand, उड्यार यानि खोह, या केव, - प्राकर्तिक रूप से बने शेल्टर को कहते हैं, लखु उडियार का अर्थ है - 100 thousand caves.
लखु उड्यार - में शैलाशृय पर उकेरी आकृतियाँ, जिनके लिए माना जाता हैं कि - ये आकर्तियाँ आदम युग के मानव ने बनाई हैं, स्वयं को अभिव्यक्त करने के लिए - माना जाता है कि प्रगतिहासिक मानव - इन शैलश्रयों यानि stone shelters मे बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए रहा करता होगा।
इस विशाल पत्थर के भीतरी भाग मे - प्राचीन मानव के बनाए चित्र देखे जा सकते हैं। माना जाता है कि ये चित्र प्रागैतिहासिक काल में आदिमानवों द्वारा बनाये गए थे। इन चित्रों में उनके दैनिक जीवन, जानवर और शिकार के तरीकों को काले, लाल और सफेद रंगों में उंगलियों द्वारा बनाया गया है। और हजारों वर्षों के बीतने के बाद ये आकृतिया अब भी दिखाई देती हैं, हालांकि थोड़ा धुंधली पड़ी हैं।
लखुड़ियार एक अच्छा पिकनिक स्थल भी हैं, नीचे की ओर बहती नदी और चीड़ के जंगल की ठंडी हवाओं के बीच परिवार अथवा मित्रों के साथ इतिहास के बीते पलों को याद करते हुए वक्त बिताने के लिए अद्भुत जगह है।
देखिये - लखुउड्यार स्टोन शेल्टर का बना यह वीडियो।
https://youtu.be/HuSvq1IWe1g
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