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अल्मोड़ा, clearly explored

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Places, heritage and experiences across अल्मोड़ा and the कुमाऊँ hills.

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झाकर सैम मंदिर, अल्मोड़ा

अगर आप अपनी रूटीन लाइफ से अलग कुछ दिन हट के एक अलग शांत और शुद्ध वातावरण में बिताना चाहते हैं, तो आज आप जानेगे एक ऐसे ही स्थान के बारे में। जहां आपको पहुचने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी। निकतम रेल्वे स्टेशन काठगोदाम से लगभग 130 किलोमीटर (लगभग 4 से 5 घंटे की)…

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कसार देवी: जहां हिमालय की ऊंचाइयां छूती है आध्यात्मिक ऊर्जा!

अल्मोड़ा से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित कसार देवी, यहाँ से दिखने वाले खूबसूरत नज़ारों के साथ-साथ ध्यान और आध्यात्म के पवित्र तीर्थस्थल - कसार देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। कसारदेवी से हिमालय की विस्तृत श्रृंखलाएँ दिखाई देती हैं। सर्दियों का समय इन पर्वत श्रृंख…

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अल्मोड़ा से चितई यात्रा और मंदिर दर्शन

अल्मोड़ा से लगभग 8.5 किलोमीटर की दुरी पर स्ठित है प्रसिद्द गोलू देवता का मंदिर चितई। आज इस लेख में आप पड़ेंगे अल्मोड़ा मुख्य नगर से NTD होते हुए, चितई मंदिर की सड़क यात्रा, मार्ग में आने वाले प्रमुख स्थानो को, चितई गोलु देवता दर्शन, चितई मंदिर का इतिहास, यहाँ से ज…

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चितई मंदिर दर्शन (डाक्यूमेंट्री)

अल्मोड़ा और समीपवर्ती लोगो के लिए चितई गोलू देव मंदिर अत्यंत पवित्र पूजा स्थल हैं, यहाँ आकर श्रृदालुओं को असीम शांति मिलती हैं। मंदिर में अनगिनत घंटिया लगी हैं, चितई गोलू मंदिर का इतिहास और कुछ जरुरी बातों के साथ दर्शन करें मंदिर का। देखें विडियो के दोनों भाग।…

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वाह उस्ताद… सईद साब…

यूँ तो दोस्तों, वक़्ती तौर पर अल्मोड़ा नगर को एक कौमी एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है जहाँ से एक से बढ़कर एक प्रतिभाएँ विकसित हुईं और एक से बढ़कर एक कलाकार पैदा हुए। यही नहीं, दशहरा और मोहर्रम में परस्पर भागीदारी ने इन मौकों को मुक़द्दस और आलीशान त्यौहा…

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विशालकाय बकायन के पेड़ की डालें काटता हुआ शेरदा

हमारा शेरदा उर्फ़ शेरुवा.... यूँ तो दोस्तों अक्सर इतिहास,साहित्य अथवा सिनेमा आदि की दुनिया में कई बार हम ऐसे चरित्रों से रुबरू होते हैं जिनका जीवन एक महामानव सरीखा यानि ' लार्जर देन लाईफ़ ' लगता है, पर यदि हम जीवन में सिर्फ अपने आप में ही ना खोए हो,अपने आसपास…

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अल्मोड़ा आकर एक परिवार की चमकने और डूबने की कहानी।

बादल... बेला… यों तो दोस्तों इस दुनिया में होने वाला हर लम्हा, हर चीज़ परिवर्तनशील है जो कि प्रकृति का नियम है। इस पर समय रुपी दौर की क्या बात करे.. अलग-2 दौर ने वक्त - 2 में आदमी को कैसे छला है.. यह सिर्फ वह आदमी या वक्त ही बता सकता है.. हम आप तो इसके केवल एक…

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अल्मोड़ा जिला पुस्तकालय की यादें

दोस्तों इस बीच एक दिन फिर जिला पुस्तकालय, अल्मोड़ा जाना हुआ किताब वापसी के सिलसिले में... पुस्तकालय बंद देखकर पता किया कि क्यों बंद है? तो जानकर एक सुखद एहसास हुआ कि पुस्तकालय के जीर्णोदार का काम चल रहा है। पुस्तकों बावत पूछने पर पता चला कि यहाँ की सारी पुस्तक…

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मिर्ज़ा साब कैफ़े वाले...

यूँ तो दोस्तों इस फ़ानी दुनिया में हर इंसान के दिलो दिमाग में कई तरह के विचार आना लाज़मी है क्योंकि वैज्ञानिक रूप से वह जानवर की श्रेणी से ऊपर है,जहां किसी चौपाऐ में दिल, दिमाग और पेट ज़मीन के समानांतर मिलेंगें वहीं इंसान में सबसे ऊपर दिमाग, फिर दिल और फिर पेट…

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मैं आज 18 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा हूँ।

आज 30 नवम्बर को मैंने 17 वर्ष पूर्ण कर 18 वें वर्ष में प्रवेश किया। 2005 में मैंने आज ही के दिन मैंने पहली बार अल्मोड़ा को देखा। लेकिन अल्मोड़ा ने मुझे बहुत देर मे देखना शुरू किया। मुझे देखने के लिए तब इंटरनेट की ज़रूरत होती, जो तब बहुत धीमा था, ज़्यादातर लोग…

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अल्मोड़ा से रानीखेत तक का सफर

प्राकृतिक सौंदर्य के आंचल में बसे उत्तराखंड की बात ही निराली है,यहां खूबसूरत वादियों के साथ-साथ विविध संस्कृति का संगम भी मिलता है, फिर आज क्यों ना अल्मोड़ा से रानीखेत का सफर किया जाएं। अल्मोड़ा शहर जिसके बारे में जितना कहु कम है, हमारी कुमाउँनी संस्कृति की असली…

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अल्मोड़ा का पेले (हरिया), कभी फूटबाल का सितारा, अब कहाँ!

आज बात केवल एक खेल प्रतिभा की। हरिया पेले ... जो अल्मोड़ा में 90 के दशक का फूटबाल का जादूगर था। बरस 1990 के शुरुआत का वह दौर जब दुनिया के एक समाजवादी देश के ढहने और 'आर्थिक आजादी' जैसे सपने के शोर में हमारा देश भी उस पीढ़ी को अपने हित के सब्ज़बाग दिखाने में का…

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अल्मोड़ा दो दशक पहले!

तब लोग मिलन चौक में लाला बाजार से थाना बाजार तक तो लगभग रोज ही घूम आते। अब भी शायद जाते हों। यह हैं अल्मोड़ा का मशहूर मिलन चौक , नाम के अनुरूप - यहाँ रोड के किनारे खड़े हो, मित्रो, परिचितों के मध्य अक्सर अनौपचारिक मीटिंग्स हुआ करती। उस दिनों जब हम अपनी स्कू ली द…

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इकबाल नाई उर्फ़ बबाल भाई…

यूँ तो दोस्तों हमारे समाज में लम्बी- 2 फेंकने वालों बड़ा महत्तवपूर्ण स्थान रहा है और रहेगा.. हालाकि उन्होंने फेंकने के अलावा समाज में बदलाव के प्रयास न किये, न ही ऐसे काम जिनके कारण उन्हें याद रखा जा सके। वो सिर्फ अपनी फेंकने की अदा से याद किए जातें है और मनोर…

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बाबा नीम करोली महाराज आश्रम/ मंदिर कैंची

बाबा नीम करोली महाराज आश्रम/ मंदिर कैंची उत्तराखंड के नैनीताल जिले में कैंची नाम की जगह में बाबा नीम करोली महाराज का कैंची धाम आश्रम, नैनीताल से 20 किलोमीटर दूर नैनीताल-अलमोड़ा रोड़ पर समुद्र तल से 1400 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। कैंची मंदिर का परिसर रोड से लगा ह…

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अल्मोड़ा से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्ति

स्वामी विवेकानंद (12 जनवरी 1863 - 4 जुलाई 1902) ने अपने हिमालय प्रवास के समय अल्मोड़ा का तीन बार दौरा किया। उन्होंने शुद्ध अद्वैत वेदांत के अभ्यास और ध्यान के लिए उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्रों को उपयुक्त मानते थे। गोविंद बल्लभ पंत (10 सितंबर 1887 - 7 मार्च 196…

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